बेटी
आज हमारी खुशी का दिन है
घर में देवी आई हैं
मंगल गीत गाओ सब बहनें
मिलकर देओ बधाई है
बिन कन्या के होता
मातृशक्ति का विस्तार नहीं
बिन कन्या के तो कल को
होगा यह संसार नहीं
यह कन्याऐ और मां बहने
सब रिश्ते मिट जाएंगे
अंकुर ही जब नहीं उगेंगे
पेड़ कहां से आएंगे
स्वागत करें और खुशी मनाएं
जन्म हुआ है कन्या का घर में बेटी आई हैं
आज हमारी खुशी का दिन है देवी आई हैं।
फल, पत्ते, टहनी, इंदन लकड़ी
सब सुविधाएं जीवन की।
ठंडी छाया मां के सुख की
भाई-बहन के सुख-दुख की
जड़ को ही जब नष्ट करेंगे
छाया कैसे पाएंगे।
सेवा प्यार सभी कुछ देती।
रंज उदासी सब हर लेती
गले लगाओ खुशी मनाओ
मां लक्ष्मी ने दया दृष्टि से
घर में लक्ष्मी आई है।
आज हमारे खुशी का दिन देवी आई है।
सती सीता सती सावित्री सती अनुसुइया
सती सुलोचना सती द्रौपदी सती वृंदा
सती...... सब सतियो के नाम
अमर हैं विदुषी हैं, वीरांगना है
वीर प्रसूता है महिलाएं।
सेवा त्याग प्रेम स्नेह की
दया और ममता की मूरत है महिलाएं
कठिन समय पर दुर्गा , मां काली , मां चंडी
का भी रूप दिखा देती हैं महिलाएं
आज जिन्होंने जन्म लिया है
कल वो क्या-क्या रूप धरेगी
जो जो काम अधूरे रह गए
वो भी सारे पूर्ण करेंगी
लाड़ दुलार करो सब सारे
उसके बाद पढ़ाई है
आज हमारी खुशी का दिन है घर में देवी आई है ।
सारी उदासी छू हो जाती
एक हंसी किलकारी से
कितने मुखड़े रंग जाते हैं
रंग भरी पिचकारी से
कई रंग के फूल खिलेंगे
आज बनी इस क्यारी से
छन छन छन छन पायल की धुन
नन्ही राजदुलारी से
दादा-दादी लाड लड़ाते
चाचा बुआ खुशी जताते
आज भतीजी आई हैं
आज हमारी खुशी का दिन है घर में देवी आई हैं।
सुधा शर्मा